Wednesday, October 31, 2012
Saturday, October 13, 2012
तकलीफ
रोई वो इस कदर,,
उनकी लाश से लिपट कर,
यह सोच कर,
की वो उन्हें खुद से वापिस ले आएँगी
वापिस चुरा लेंगी उन्हें,
सजा लेंगी वो उन्हें अपनी पलकों में,
कुछ इस कदर
की ढूंड ने पर भी
उन्हें खुदा न ढूंड पाए,
उनकी लाश से लिपट कर,
यह सोच कर,
की वो उन्हें खुद से वापिस ले आएँगी
वापिस चुरा लेंगी उन्हें,
सजा लेंगी वो उन्हें अपनी पलकों में,
कुछ इस कदर
की ढूंड ने पर भी
उन्हें खुदा न ढूंड पाए,
Sunday, September 30, 2012
सोच
वोह बैठे थोड़े शांत थे,
शायद समय की गहराई में खोये हुए थे,
कुछ सोच रहे थे न जाने क्या ,
या फिर कुछ ढूंढ़ रहे थे ,
चमकते हुए टिमटिमाते हुए ,
तारो के बीचो बिच,
पूर्णिमा की रात में ,
पर फिर वो मुस्कु रा दिए ,
शायद कुछ एहसास हुआ होगा,
उठ खड़ा हो कर वो,
आगे चल दिए , गुनगुनाते हुए लफ्जों को ,
चमकते हुए टिमटिमाते हुए ,
तारो के बीचो बिच,
शायद समय की गहराई में खोये हुए थे,
कुछ सोच रहे थे न जाने क्या ,
या फिर कुछ ढूंढ़ रहे थे ,
चमकते हुए टिमटिमाते हुए ,
तारो के बीचो बिच,
पूर्णिमा की रात में ,
पर फिर वो मुस्कु रा दिए ,
शायद कुछ एहसास हुआ होगा,
उठ खड़ा हो कर वो,
आगे चल दिए , गुनगुनाते हुए लफ्जों को ,
चमकते हुए टिमटिमाते हुए ,
तारो के बीचो बिच,
Saturday, September 22, 2012
Friday, September 21, 2012
किस्मत
देखा था मैंने उसको मुझे घूरते हुए,
आँखों में उसकी मुझे एक भूक दिखी,
जब में खुद बैठा था एक गाड़ी में,
और मेरी हैसयत उससे बड़ी थी ,
पर उसकी आँखें वो बोल गई ,
जो बंद होठ भी न बोल पाए,
उसमे इतनी ताकत थी,
जो मेरे विचारो को हिल गए ,
और में यह सोचने बैठ गया,
की हैसयत सब कुछ नहीं,
भूक भी कुच्छ होती है,
जो उसने बोल मुझसे ,
शायद मुझमे बोलने की हिम्मत नहीं है,
गलती उसकी भी नहीं है की वो बहार धुप में खड़ा है ,
और में अंग्दर खिड़की बंद कर क बैठा हूँ,
यह सब नसीब का खेल है,
आज ख़राब है उसका,
और शायद कल मेरा हो,
छोटा बड़ा कोई नहीं है दोनों मेसे,
सब नसीब का खेल है,
अगर आज किस्मत ख़राब है उसकी,
शायद कल मेरी हो
Tuesday, August 28, 2012
तू ही बता
है खफा ज़िन्दगी हमसे क्यू ,
न जाने क्यू
तू ही बता
अँधेरी ज़िन्दगी में चलते हैं हम ,
उलझनों से गुज़रते हैं हम ,
कैसे छलु में तेरे बिना ,
तू ही बता
मेरा साथ यूह छोड़ के ,
उम्मीद का दमन तोड़ के ,
चल दिए आगे क्यू ?
हमे पीछे छोड़ के ,
तू ही बता
क्या सितम किये तुझ पर मैंने जो ,
तूने कुछ न कहा ,
एक ही झटके में तूने ,
यह रिश्ता तोड़ दिया ,
तू ही बता
तू ही बता
तू ही बता
Friday, June 29, 2012
बिखरे सपने
देखे जो सपने मैंने कितने,
टूटे तो शीशे से बिखर जाए,
जोडू तोह जुड़े ना ,
और अगरजुड़ भी जाए तोह ,
दरारे हटाऊ हेट ना
टूटे तो शीशे से बिखर जाए,
जोडू तोह जुड़े ना ,
और अगरजुड़ भी जाए तोह ,
दरारे हटाऊ हेट ना
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